सिंघाड़ा एक उपयोगी फलाहार है, और इसके बहुत से फायदे है।
ठंड के मौसम के आने के साथ ही साथ , एक अनुपम फल सिंघाड़े का आगमन हो जाता है। अक्टूबर नवंबर दिसम्बर माह मे सिंघडा पूर्ण रूप से मिलने लगता है।
सिंघडा एक अत्यंत पौष्टिक और फलाहारी होता है। इसका व्रत त्यौहार मे इसका प्रयोग लाभदायक होता है। सिंघडा मे विटामिन ए , विटामिन सी , लौह , मैगनीज , प्रोटीन , वसा पर्याप्त रूप मे पाया जाता है। चूकि यह पचने मे हल्का होता है। अतः व्रत के दिनों मे इसका उपयोग उबालकर या कच्चा लेना शक्ति वर्धक एवं उपयोगी होता है।
सिघाड़ा स्वभाव से शीतल ,मधुर , बलवर्धक ,रक्तविकार, को दूर करने वाला होता है।
सिघाड़े के फ़ायदे - :
1 . अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद होता है. सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी आराम मिलता है.
7 . सिंघाड़े की बेल को पीसकर उसका पेस्ट शरीर में जलन वाले स्थान पर लगाएं। इससे दर्द में आराम मिलता है।
8 . अगर मांसपेशियां कमजोर हैं या वीकनेस है तो, सिंघाड़ा खाएं। सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है।
9 . गले में इन्फेक्शन होने पर सिंघाड़े का आटा दूध में मिलाकर पिएं, तुरंत राहत मिलेगी।
ठंड के मौसम के आने के साथ ही साथ , एक अनुपम फल सिंघाड़े का आगमन हो जाता है। अक्टूबर नवंबर दिसम्बर माह मे सिंघडा पूर्ण रूप से मिलने लगता है।
सिंघडा एक अत्यंत पौष्टिक और फलाहारी होता है। इसका व्रत त्यौहार मे इसका प्रयोग लाभदायक होता है। सिंघडा मे विटामिन ए , विटामिन सी , लौह , मैगनीज , प्रोटीन , वसा पर्याप्त रूप मे पाया जाता है। चूकि यह पचने मे हल्का होता है। अतः व्रत के दिनों मे इसका उपयोग उबालकर या कच्चा लेना शक्ति वर्धक एवं उपयोगी होता है।
सिघाड़ा स्वभाव से शीतल ,मधुर , बलवर्धक ,रक्तविकार, को दूर करने वाला होता है।
सिघाड़े के फ़ायदे - :
1 . अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद होता है. सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी आराम मिलता है.
2 . सिंघाड़े का सेवन रक्त संबंधी समस्याओं को भी ठीक करता है. साथ ही मूत्र संबंधी रोगों के उपचार के लिए सिंघाड़े का प्रयोग बहुत फायदेमंद है. दस्त होने पर भी सिंघाड़े का सेवन रामबाण उपाय है.
3 . सिंघाड़ा शरीर को ऊर्जा देता है, इसलिए इसे व्रत के खाने में शामिल किया जाता है. इसमें आयोडीन भी पाया जाता है, जो गले संबंधी रोगों से रक्षा करता है और थाइरॉइड ग्रंथि को सुचारू रूप से काम करने के लिए प्रेरित करता है.एसिड
4 . सिघाड़ा एक अत्यनत बलवर्धक एवं पित्तशामक फल है। अतः दुबले पतले शरीर वालो के लिए , यह अमृत तुल्य सिद्ध होता है।
5 . मरीजों को कच्चा या उबालकर सिघाड़ा का प्रयोग करना चाहिये
( एलकेलाइन ) गुण होने के कारण , यह पाचनतंत्र एवं शरीर के ऊतकों
से (एसिड ) का शीघ्र ख़त्म करता है।
6 . वो महिलाएं जिनका गर्भाशय कमजोर हो, उनके लिए ये फायदे मंद है साथ ही साथ कमर का दर्द, पैर का दर्द भी दूर होता है। नियमित कच्चा सिंघाड़ा खाएं इससे फायदा होता .
7 . सिंघाड़े की बेल को पीसकर उसका पेस्ट शरीर में जलन वाले स्थान पर लगाएं। इससे दर्द में आराम मिलता है।
8 . अगर मांसपेशियां कमजोर हैं या वीकनेस है तो, सिंघाड़ा खाएं। सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है।
9 . गले में इन्फेक्शन होने पर सिंघाड़े का आटा दूध में मिलाकर पिएं, तुरंत राहत मिलेगी।
10. ख़ूनी बवासीर या रक्तस्राव को रोकने के लिए सिघाड़े का प्रयोग लाभकारी होता है।
11 . शरीर की सूजन को दूर करने के लिए इसका प्रयोग गुणकारी होता है।
12 . बालो की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।
12 . बालो की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।
सिघाड़ा बलवर्धक एवं ज्ञान शक्ति को बढ़ाने वाला होता है अतः किसी भी लम्बी बीमारी के बाद , जैसे बुखार , टायफिड आदि के बाद सिघाड़े का प्रयोग , रोगी की डिजिएस्ट सिस्टम को ध्यान मे रखते हुये करना चाहिए। यह (एंटीऑक्सीडेंट ) गुणों से भरपूर होने के साथ साथ शरीर मे वसा , विटामिन्स , एवं खनिज लवणों की आपूर्ति करने वाला उत्तम फल होता है।

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